Posts

Showing posts with the label निराशा

निराशा‌ क्यों आती है ।

Image
श्री महाराज जी :- जो प्राप्त वस्तु है उसका अनादर करने से निराशा आती है। सोचो, हमको मानव देह मिला, भारत में जन्म मिला महापुरुष मिला, तत्वज्ञान मिला, उसके द्वारा दिया हुआ, तो सात अरब आदमियों में कितने आदमी हमारे बराबर है जिनको ये सब सौभाग्य प्राप्त है। कितने हजार आदमी है, कितने लाख आदमी है जिनको इतनी भगवत्कृपा मिली है जितनी हमको मिली हैं।  तो तुम्हारे दिमाग में ये आएगा कि ऐसे तो बहुत कम लोग है। बार - बार सोचो, कितनी बड़ी भगवत्कृपा मेरे ऊपर है अगर मृत्यु के एक सेकण्ड पहले भी आपको यह बोध हो गया कि कितना सौभाग्यशाली हूँ कितनी भगवत्कृपायें मेरे ऊपर हुई है।  1) देव - दुर्लभ मानव देह अनन्त जीवों में किसी - किसी भाग्यशाली को ही मिलता है, फिर मेरे जैसा सौभाग्यशाली कौन होगा जिसको ऐसा गुरु मिला जो केवल कृपा ही करता है। जब उनका अनुग्रह प्राप्त है तो निराशा की क्या बात है। धिक्कार है, मेरे जीवन को। अपनी बुद्धि को उनके श्रीचरणों में डाल दो तो निराशा हट जायेगी। और अगर हट गई और मृत्यु हो गई, तो अगले जन्म में फिर आपको आशावाद के अनुसार ही फल मिलेगा।  2) प्राप्त कृपाओं का बार - बार चिन्तन करन...